सहवाग का सन्यास एक फैन की नजर से

सोमवार रात करीब 11 बजे फुर्सत में जब वट्सएप्प ओपन किया तो एक ग्रुप में सहवाग के शानदार करियर का मैसज पड़ा था और लास्ट में लिखा था मिस यू वीरु. मैसज पढ़कर ऐसा लगा जैसे सहवाग ने सन्यास ले लिया हो क्योंकी वो मैसेज एक फिनिशिंग मैसेज की तरह था. मन में थोडी शंका के साथ घबराहट भी हुई की क्या ये सच है? तुरंत फेसबुक ओपन किया, टाइमलाइन पर सहवाग के रिटायरमेंट की ख़बर थी. ट्विटर पर भी टॉप टेन ट्रेंड में #थैंकयूसहवाग ट्रेंड कर रहा था. सहवाग को जितना प्यार मिल रहा था, साथ में धोनी को उतनी ही गालियां मिल रही थीं.

दिल मानों टूट सा गया था, एक बहुत गहरा धक्का लगा था. क्रिकेट देखना तो सहवाग के टीम से बहार होने के साथ ही छूट गया था मगर फिर भी इक्का-दुक्का लोगों के मुंह से क्रिकेट की बात सुनाई पडती तो सहवाग की याद आ ही जाती थी. लोग कोहली की पारी की बात कर रहे होते थे मगर मन में तो बस नजफगढ़ के नवाब के चौके-छक्के ही बसे थे.

अब तक सहवाग की वापसी की उम्मीद के साथ दिल में क्रिकेट का कुछ जुनून सा बाकी था मगर अब वो भी खत्म हो गया. वहीं दूसरी ख़बर थी कि सहवाग ने अभी इसकी अधिकारिक रुप से पुष्टी नहीं की है. मन में फिर से उम्मीद की किरण जागी की शायद अभी इस बल्लेबाज का फेयरवेल मैच के रुप में एक शानदार पारी देखने का मौका मिलेगा और बहुत दिन बाद मैं मैच देखूंगा. उम्मीद पूरी थी कि जिस खिलाड़ी ने भारत को और क्रिकेट जगत को इतना कुछ दिया उसे कम से कम एक आखरी मैच खेलने का मौका तो मिलेगा. मगर पता चला की बीसीसीआई ने सहवाग की ये अपील भी ठुकरा दी, सहवाग दक्षिण अफ्रीका में होने वाली टेस्ट सीरीज में टेस्ट मैच खेलना चाहते थे मगर उनके नाम के बगैर ही टीम का ऐलान कर दिया गया.

ये ख़बर पढ़ कर स्वार्थ से भरी इस दुनिया से मन सा उठने लगा. मन में सवाल कौंदने लगे क्या बीसीसीआई के लिए पैसा ही सबकुछ हो गया? क्या कोई क्रिकेट बोर्ड दुनिया के इस महान खिलाड़ी को सम्मान के साथ विदाई भी नहीं दे सकता. फिर उसका दुनिया का सबसे बडा क्रिकेट बोर्ड कहलाने का फायदा ही क्या. क्रिकेट जगत की जिस गंदी राजनीति का शिकार सहवाग हुए उसकी परतें अब खुलने लगी हैं. क्रिकेट की दुनिया के बाहुबली सामने आने लगे हैं. वीवीएस लक्षमण, राहुल द्रविड, सचिन तेंदुलकर और जहीर खान जैसे दिग्गजों के सन्यास की यादें मन में आने लगीं. किस तरह एक-एक कर सारे सीनियर खिलाड़ियों को टीम से बहार कर दिया गया. सहवाग के सन्यास के साथ ही अगली बारी गंभीर और युवराज की नज़र आने लगी है.

बुराई पर अच्छाई की जीत के त्योहार दशहरा से पहले ही अच्छाई पर बुराई की जीत हो गई. मन में तमाम ऐसे खिलाडियों की लिस्ट सामने आने लगी जो खराब फोर्म के बावजूद लगातार टीम में बने हुए हैं. अगले ही दिन सहवाग ने भी अपने 37वें जन्मदिन के दिन अधिकारिक रुप से सन्यास की घोषणा कर क्रिकेट की दुनिया में एक विस्फोट सा कर दिया.

मन में अब सहवाग की तूफानी पारीयां याद आने लगी थी, याद आने लगे वो दिन जब सचिन, सहवाग, गंभीर क्रीज पर होते थे. याद आने लगे वो दिन जब सहवाग के आउट होते ही टीवी बंद हो जाता था और हाथ में किताब आ जाती थी. एग्जाम के बीच में भी सहवाग की बैटिंग देखना नहीं भूलते थे. उन दिनों लाईट भी बहुत जाती थी और लाईट जाते ही केबल ऑपरेटर का नेटवर्क भी चला जाता था. फिर भाग कर गली में खड़ी कार में एफएम गोल्ड लगाता था, ताकि कहीं कोई छक्का-चौक्का ना छूट जाए.

ये बीएसएनएल चौका जब कानों में पडता था तो मन झूम जाता था. पडोसी भी अंगड़ाई तोड़ते हुए कमेंट्री सुनने अपनी रेलिंग पर आ जाते थे. क्या जुनून था वो, क्या दौर था वो, क्या क्रेज था वो जो अब कभी वापस नहीं आने वाला. जिस दुकान पर टीवी में क्रिकेट मैच चल रहा होता था, वहाँ देखने वालों की भीड़ अपने आप जुट जाती थी. आजकल तो ऐसा नजारा नज़र नहीं आता. वैसे हम खुशनसीब भी हैं की हमने क्रिकेट का वो गोल्डन पीरियड देखा है जिसमें सचिन और सहवाग खेलते थे.

सचिन के नर्वस नाईनटीस के दौर में भी सहवाग अपना शतक छक्का मार कर ही पूरा करते थे. सचिन बीच बीच में समझाते भी रहते थे की धीरे खेल सहवाग मगर सहवाग कहाँ मानने वाले थे. वे तो बस इसी फिराक में रहते थे की कब चौका या छक्का मारुं. जब सहवाग टेस्ट क्रिकेट में अपने पहले तिहरे शतक के करीब थे तो उन्होंने सचिन से कहा की सर अब में धीरे नहीं खेलूंगा अब टीम भी अच्छी पोजीशन पर आ गयी है, आउट भी हो गया तो कोई फिक्र नहीं. तब 294 पर खड़े सहवाग ने अपने 300 रन छक्का लगा कर पूरा किया था.

ऐसा विस्फोटक बल्लेबाज जिसने पाकिस्तान में जाकर रावलपिंडी एक्सप्रेस की पिंडी कंपा दी थी. इस खिलाडी की एक और खासियत थी की जहाँ कोई ना चले वहाँ सहवाग चलता था. ऐसे बहुत से मौके आए जब पूरी टीम एक तरफ और सहवाग एक तरफ. वर्ल्ड कप 2011 की बात करें तो सहवाग ने वर्ल्ड कप के पहले मैच की शुरुआत चौका मार कर की, हो सकता है बॉलर पहले मैच में सहवाग की चौका मारने की इस इच्छा से वाकिफ ना हो. मगर काबिलियत का पता तभी चलता है जब सामने वाले बॉलर को पता है कि ये चौका मारना चाहता है फिर भी सहवाग हर मैच की हर पहली गेंद पर चौका मारने लगे.

सहवाग जब तक क्रीज पर रहते थे तब तक दिल की ध़डकनें बढी ही रहती थी, एक पल भी टीवी स्क्रीन से नज़र हटाना मंजूर नहीं होता था. कोई नहीं जानता था कि अगले पल क्या होगा…आऊट या सिक्स. आज हालत ये है कि टीवी में स्पोर्टस पैक की भी ज़रुरत महसूस नहीं होती. पसंदीदा खिलाडियों के टीम से बहार निकल जाने के बाद अब क्रिकेट में मन सा ही नहीं लगता. पता नहीं आजकल लोग फिक्सिंग के साये में कैसे मन लगाते हैं. जाते-जाते सहवाग से एक उम्मीद बाकी थी की कम से कम सहवाग का जलवा आईपीएल में तो देखने को मिलेगा मगर सहवाग उससे भी मना कर गए. सहवाग के अंतराष्ट्रिय क्रिकेट से सन्यास के बाद हमारे सर पर सवार क्रिकेट का भूत भी अब उतरने लगा है. सहवाग के सन्यास के बाद ही हमने भी क्रिकेट देखने से सन्यास ले लिया है. क्योंकी क्रिकेट की दुनिया में ऐसा खिलाडी ना कभी था और ना कभी आएगा.

ये है इंडिया का त्यौहार- हो गया बंटाधार

[box]By Ajay[/box]

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ये है इंडिया का त्यौहार- ये लाईन तो आपने सुनी ही होगी. बस यही छोटी सी लाईन काफी है आईपीएल का गडबडझाला समझने के लिए. आईपीएल ने खेल को त्यौहार बना दिया. त्यौहार बना दिया! चियर लिडरस का, लेट नाईट पार्टिज़ का त्यौहार. जेनटलमैन गेम क्रिकेट को खेलने वाले खिलाडियों ने कभी सोचा ना होगा की एक दिन ऐसा भी आएगा जब इस खेल के भी खिलाडीयों की खरीद-फरोख्त होगी. खुले बाजार में क्रिकेटरों की निलामी आईपीएल से ही शुरु हुई. खुद को पैसे से मालामाल होता देख खिलाड़ी भी बिना किसी विरोध के निलाम होते रहे. कुल मिलाकर ये खेल एक बिजनेस का रुप धारण कर चुका है और बिजनेस में तो सबकुछ जायज होता है.

सारी टीमों के मालिक बिजनेसमैन, सबकुछ पैसा कमाने के लिए किया जाने लगा. जाहिर सी बात है कि कोई बिजनेसमैन किसी चीज में तभी पैसा लगाता है जब उसे उसमें अपना फायदा दिखाई पडता हो. खेल को बढावा देने के लिए अगर पैसे लगाने होते तो उसके और भी कई रास्ते थे. सहारा की टीम इंडिया की स्पांसरशिर खत्म हो जाने के बाद भी बीसीसीआई को स्पांसरशिर के लिए कोई दूसरी कंपनी नहीं मिली थी. फिर कुछ समय के लिए सहारा की ही स्पांसरशिर बढ़ा दी गयी थी मगर आईपीएल में बिजनेसमैन पैसा लगाने के लिए ललायित रहते हैं.

कमाई का साधन सिर्फ खेल ही नहीं सट्टा भी बन गया. आईपीएल के मैचों पर सट्टा लगाने वालों में कॉलेज के स्टूडेंटस से लेकर बड़े-बड़े सट्टेबाज तक शामिल है. जब सट्टा भी करोडों में लगने लगा तो फिर टीम मालिक और खिलाडी इससे कहां दूर रह पाते. सट्टे के इस खेल ने अपना दूसरा रुप धारण कर लिया जिसे मैच फिक्सिंग कहते हैं. सबसे पहले निशाना नये खिलाडियों को बनाया गया, शुरुआत गेंदबाजों से हुई. किसी टीम के सभी खिलाड़ियों का फिक्स होना तो मुश्किल है इसलिए तीन से चार खिलाडियों को फिक्स कर लिए जाता. फिक्सर जानते थे कि बड़े खिलाडीयों को फसाना मुश्किल है क्योंकी वो खेल के लिए खेलते हैं ना कि उन्हें पैसो की कोई खास जरुरत है. इसलिए क्रिकेट की दुनिया में पैर रख रहे खिलाडियों को चुना गया.

क्रिकेट के इस नंगे नाच के बारे में जानते सब थे भले ही वो इसमें शामिल ना हों. ये भी हो सकता है कि कोई खिलाडी सन्यास लेने के बाद सारी असलियत उडेल कर रख दे. फिक्सर इतने पावरफुल हो चुके हैं कि वो आईपीएल शुरु होते ही बता देते है कि इसबार कौन सी टीम मैच जीत रही है. ये सब रुके भी कैसे जब बीसीसीआई खुद संदेह के घेरे में है. श्रीनिवासन से लेकर चेन्नई सुपर किंग के बड़े खिलाड़ी भी इसकी गिरफ्त में हैं. जानकारों के मुताबिक आईपीएल तो बना ही इसी के लिए है. तो आप भी समझ जाइये कि ये इंडिया का किस तरह का त्यौहार है और इंतजार कीजिए सुप्रीम कोर्ट में बंद लिफाफे में जमा नामों के सार्वजनिक होने का.

अभी तक ये नाम सिर्फ इसलिए सार्वजनिक नहीं किये गये ताकि क्रिकेट की शाख को बट्टा ना लागे. भारत में सबसे अधिक देखे जाने वाले खेल से दर्शकों का विशवास ना उठ जाए, इसलिए सुप्रिम कोर्ट भी इस मामले में फूंक फूंक कर कदम रख रहा है.

इन ’11’ खिलाड़ियों को कहना पड़ेगा IPL को अलविदा

[box]By Vipin[/box]

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नई दिल्ली: आईपीएल में सट्टेबाज़ी के आरोप में आज जस्टिस लोढ़ा कमेटी ने अपना फैसला सुनते हुए बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन और अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा पर आजीवन क्रिकेट से जुड़ने को लेकर प्रतिबंध लगा दिया है. ये दोनों अब किसी भी लेवल के क्रिकेट से नहीं जुड़ पाएंगे. इसके साथ ही जस्टिस लोढ़ा कमेटी ने आईपीएल में धोनी की कप्तानी वाली चेन्नई सुपर किंग्स और अजिंक्ये रहाणे वाली राजस्थान रॉयल्स पर 2 सालों के लिए प्रतिबंध लगा दिया है. अगले दो सालों तक ये दोनों ही टीमें आईपीएल में नज़र नहीं आएंगी.

इस बड़े फैसले से बड़ा सवाल ये उठता है कि उन खिलाड़ियों का क्या होगा जो टीम इंडिया का हिस्सा हैं और जिनके बिना आईपीएल बिल्कुल बेरंग हो सकता है. जी हां ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि टीम इंडिया में खेलने वाले 11 खिलाड़ी चेन्नई और राजस्थान रॉयल्स टीम से आते हैं.

चेन्नई सुपर किंग्स के 7 खिलाड़ी और राजस्थान रॉयल्स के 4 खिलाड़ी टीम इंडिया में खेलते हैं. टीम इंडिया में खेलने वाले चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाड़ी हैं भारत के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी, बल्लेबाज़ सुरेश रैना, ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा, स्पिनर आर अश्विन, तेज़ गेंदबाज़ मोहित शर्मा और आशीष नेहरा.

वहीं राजस्थान रॉयल्स के ओपनर और हाल ही में ज़िम्बाबवे खेलने गई टीम इंडिया के कप्तान अजिंक्ये रहाणे राजस्थान रॉयल्स टीम का हिस्सा हैं. वहीं ऑलराउंडर स्टुअर्ट बिन्नी, तेज़ गेंदबाज़ धवल कुलकर्णी और हाल ही में टीम इंडिया से जुड़े विकेटकीपर बल्लेबाज़ संजू सैमसन भी राजस्थान टीम से ही खेलते हैं.

इन 11 खिलाड़ियों में से 7 खिलाड़ी वो हैं जो विश्वकप खेलने गई भारतीय टीम का हिस्सा थे. अब राजस्थान और चेन्नई की टीम पर बैन से ये सवाल उठता है कि क्या टीम इंडिया के इन बड़े खिलाड़ियों की गैर हाज़िरी में आईपीएल 9 और 10 कितना सफल हो पाता है.

देश के सबसे लोकप्रिय कप्तान समेत टीम इंडिया के कई बड़े खिलाड़ी अगले 2 सीज़न आईपीएल का हिस्सा नहीं होंगे! हालांकि अगर BCCI Chennai IPL और Rajasthan Royals को एक अलग ऑनर को बेच दें तो ये दोनों टीमें अगले साल IPL में हिस्सा ले सकती हैं.

अटाली दंगे- तब, अब और आगे

[box]By Ajay[/box]

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करीब 1 माहीने पहले जब अटाली गावँ में मंदिरमस्जिद के चलते विवाद उपजा तो इस विवाद पर सांप्रदायिक ताकतों की नजर पड गई. शुरूआत में तो गावँ के बहुसंख्यक समुदाय में 2 धड़े बंटे नज़र आए जिससे विवाद थामने की बजाए और बढ़ता चला गया. अपने जले घरों को छोड़ अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने डर के मारे बल्लभगढ़ थाने में डेरा डाल लिया.

ओवैसी बनाम प्राची

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आपसी सुलह से विवाद को सुलझाने की कोशिश की जाने लगी. मगर आग में घी डालने दर्जन भर ओवैशी समर्थक कार में सवार होकर अटाली पहुँच गए. ओवैशी समर्थकों ने मुस्लिम समुदाय के लोगों को लड़ाई में मदद की पेशकश की पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने समझदारी का परिचय देते हुए कहा की उन्हें यहीं एक साथ इसी गावँ में रहना है और ऐसा आपसी भाईचारे से ही संभव हो पाएगा और किस भी प्रकार की मदद लेने से मना कर दिया. जब चेलों से काम ना चल सका तो ओवैशी खुद अटाली पहुंचे. दूसरे पक्ष वाले भी कहां कम थे. उनकी तरफ से भी शांतिदूत के रूप में साध्वी प्राची ने आकर शांति का पैगाम दिया. ये पैगाम भी ऐसा ही था जैसे पैगाम के लिए वो जानी जाती हैं. सबसे बड़ा सवाल तो यही उठता है कि ऐसे तनावपूर्ण माहौल में ऐसे लोगों को गावं में आने की अनुमति क्यों दी गई?

कोई तो है जो आग में घी डाल रहा है

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केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुज्जर ने बातचीत के जरिए दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझाने का दावा तक कर दिया. जिसके बाद पुलिस के पहरे के बीच धीरेधीरे सबकुछ सामान्य होने लगा. गावँ से पलायन कर गए परिवार वापस अपने घरों में आ गए. मगर एक आग थी जो फिर भी भीतर ही भीतर धधक रही थी. कोई तो था जो दोनों पक्षों को भड़काने का काम कर रहा था. इसके बाद 1 जुलाई को मंदिर में कीर्तन करती महिलाओं पर किसी ने पत्थर फेकें दिया. पत्थर की चिंगरी ने एक बार फिर दोनों पक्षों को आमनेसामने लाकर खड़ा कर दिया. भारी पुलिस बल ने हालात पर कुछी घंटों में काबू पा लिया. डर के मारे अधिकांश अल्पसंख्यक परिवार पलायन कर गए. अपने घर में से समान समेट कर आसूं भरी आँखों से गावं से विदाई ले गए.

एक्शन में देर से आई पुलिस हुई हैरान

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इसके बाद एक्शन में आई पुलिस ने गांव में तलाशी अभियान चलाया. तलाशी अभियान में जो निकल कर सामने आया वो सचमुच हैरान कर देने वाला था. छोटे मोटे कट्टे जैसे हथियार तो गावं में आम बात होते हैं मगर संप्रदाय विशेष के धार्मिक स्थल से ऐके-47 जैसे आधुनिक हाथियर मिलने से पुलिस के भी रौंगटे खड़े हो गए. वहीं धार्मिक स्थल में एक सुरंग भी पायी गई जिसका रास्ता गावं से बाहर जाकर निकलता है. सुरंग कुछ ही दिनों पहले ही बनाई गयी थी. जाहिर है ऐसा किसी बाहरी मदद के बिना संभव नहीं है. पुलिस ने सर्च अभियान तेज कर दिया है और जिन लोगों के खिलाफ केस दर्ज था उनकी गिरफ्तारियां भी शुरू कर दी है. इसमें बहुसंख्यक समुदाय के 80 से अधिक लोगो को गिरफ्तार किया गया है और 9 लोगों को जेल भेज दिया गया है. जिसके चलते पास के गांव दयालपुर, मछगर और चंदावली के लोगों ने आसपास के सारे रास्ते जाम कर दिए और विरोध प्रदर्शन किया.

दंगों की हो रही है बारिशइंसान से लेकर जानवर तक है परेशान

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आपसी भाईचारे के लिए जाने जाने वाले पलवल के टिकरी ब्राह्मण गावं में ट्यूबवेल से पानी भरने की छोटी सी बात को लेकर दो समुदाय के बीच जमकर पथराव हुआ और 15 से अधिक घर जला दिए गए. कुछ दिन पहले यूपी के मुज्ज़फरनगर में भी और शामली में भी छोटी सी बात को लेकर 2 समुदायों के बीच झगड़े की ख़बर सामने आई है. माना जा रहा है की यूपी में जिला पंचायत चुनाव के मद्देनज़र माहौल बिगड़ने की कोशिश की जा रही है. अगर हरियाणा की तरफ से नजर दौड़ाएं तो अभी हाल फिल्हाल कोई चुनाव नजर नहीं आता. फिर भी छोटी छोटी बातें बड़े विवाद का रूप ले ले रही हैं. हरियाणा पुलिस इस समय हाई अलर्ट पर है. झग़डे की आशंका के चलते केंद्र से अतरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं. सर्च अभियान और पुलिस की धरपकड़ के चलते गावं के युवा आस पास के गांवों में जाकर छुप गए हैं. घरों में केवल बूढ़े, बच्चे और महिलाएं रह गई हैं. सबसे अधिक परेशानी पशुओं को उठानी पड़ रही है. कई घरों में तो पशुओं को चारा डालने वाला तक नहीं है. ये मौसम धान की बुआई का है मगर झगडे के चलते बुआई नहीं हो पाई है जिससे गावं के किसान खासे परेशान है.

ज़िम्बाब्वे दौरे से पूरी तरह से बदल सकता है टीम इंडिया भविष्य

[box]By Praveen[/box]

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ज़िम्बाब्वे दौरे के लिए भारतीय क्रिकेट टीम का ऐलान कर दिया गया. धोनी, कोहली, रोहित, अश्विन जैसे बड़े खिलाड़ियों को इस दौरे के लिए आराम दिया गया है. धोनी और कोहली की गैरहाजरी में रहाणे को कप्तानी की कमान दी गयी है. इस दौरे पर हरभजन, उथ्थपा, मुरली विजय जैसे खिलाड़ियों की लंबे समय बाद टीम में वापसी हुई है. मनीष, जाधव, संदीप जैसे युवा खिलाड़ियों के लिए टीम में चुने जाने के बाद खुद की प्रतिभा को साबित करने के लिए ये दौरा एक सही अवसर साबित हो सकता है.

ज़िम्बाब्वे की टीम लंबे समय से खिलाडियों के प्रति अपने बोर्ड के रुख से काफी खस्ता हालात में चली रही है. पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए हालिया मैचों में उनका प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा. टेलर जैसे अनुभवी खिलाडी की कमी टीम में खासतौर पर देखी गई. इन सब के बीच भी जो सबसे बड़ा सवाल निकल कर आ रहा है वो यह है कि ज़िम्बाब्वे की टीम समय-समय पर उलटफेर करके विश्व की बड़ी टीमों की चौंकाती रही है. तो क्या इस बार भी धोनी और कोहली जैसे बड़े खिलाड़ियों की गैरहाजरी में वह फिर से ऐसा कोई कारनामा करके भारत को हैरान कर सकती है?

पहले बांग्लादेश जैसी टीम को कमजोर मान कर भारतीय टीम बड़ी फजीहत करा चुकी है. ऐसे धोनी और कोहली जैसे सभी सीनियर खिलाड़ियों को एक साथ आराम देने के फैसले को अधिक सही नहीं ठहराया जा सकता. धोनी के प्रदर्शन में लंबे समय से निरंतरता का आभाव रहा है जिसका असर उनकी कप्तानी पर भी साफ़ तौर पर देखा जा सकता है. ऐसे में अगर धोनी के कप्तान के तौर पर भेजा जाता तो एक बड़ी जीत उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में काफी मददगार साबित हो सकती थी. कोहली भी लंबे समय से अपनी फॉर्म से जूझ रहे हैं और अगर इन्हें कप्तान के तौर पर भेजा जाता तो भविष्य के नजरिये से ये दौरा इनके लिए अच्छा अभ्यास साबित हो सकता था.

रहाणे को किसी भी बड़े टूर्नामेंट में कप्तानी का कोई अनुभव नहीं रहा है. यहाँ तक कि वनडे टीम में अब तक वो अपना खुद का स्थान भी पक्का नहीं कर पाये हैं ऐसे भी सभी नए खिलाड़ियों और सीनियर खिलाड़ियों के बीच संतुलन बनाने को लेकर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. रोहित शर्मा, शिखर धवन और रैना जैसे खिलाड़ियों को एक साथ आराम देने के फैसला भी हैरान करने वाला रहा. बेहद प्रतिभाशाली होने के बावजूद इनका प्रदर्शन ज्यादातर समय अपनी प्रतिभा के अनुरूप नहीं रहा है. रोहित शर्मा ने अपने पिछले ज़िम्बाब्वे दौरे में दो शतक जड़े थे ऐसे में ये दौरा उनके लिए प्रदर्शन में निरन्तरता लाने के लिहाज से अच्छा मौका साबित हो सकता था. इसके साथ ही रोहित को आईपीएल में कप्तानी का अनुभव भी है और वो अपनी कप्तानी के अनुभव के बल पर टीम को फायदा पहुंचा सकते थे.

हरभजन, मुरली, उथ्थपा, मनोज तिवारी लंबे समय से टीम में वापसी का इंतजार कर रहे थे. मुरली को टेस्ट टीम में अच्छे प्रदर्शन का इनाम मिला है और इस दौरे पर अपनी उपयोगिता साबित करके वो अपनी जगह वनडे टीम में भी पक्की कर सकते है. आईपीएल में लगातार अच्छा प्रदर्शन करके उथ्थपा भी टीम में वापिस आने में कामयाब रहे हैं. विकेटकीपर के तौर पर भी उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की है ऐसे में जब धोनी का करियर ज्यादा लम्बा नहीं बचा और वो इस मौके को भुना कर विकेटकीपर बल्लेबाज के तौर पर खुद को स्थापित कर सकते हैं.

रायडू और रहाणे वनडे टीम में अब तक उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं. ऐसे में मनोज तिवारी अच्छा प्रदर्शन करके मध्यक्रम में अपनी जगह पक्की कर सकते हैं. जडेजा के बाहर होने के बाद बिन्नी के लिए अपनी जगह पक्की करने का अच्छा मौका है. करण और संदीप शर्मा भी अच्छा प्रदर्शन करके सबका ध्यान अपनी और खिंच सकते हैं और ये भी साबित कर सकते हैं कि आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में उनका अब तक प्रदर्शन महज तुक्का नहीं कहा जा सकता.

पांच बातें जो रहाणे को साबित करती हैं कैप्टन मिटिरियल

[box]By Shashank[/box]

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बांग्लादेश के असफल दौरे के बाद टीम इंडिया अब अगले दौरे की तैयारी में लग गई है. 2-1 से बांग्लादेश सीरीज गंवाने वाली टीम अब जिम्बाब्वे दौरे के लिए तैयार है. इस तैयारी की शुरुआत चयनकर्ताओं ने सभी सीनियर खिलाड़ियों को आराम देने के साथ की है. चयनकर्ताओं ने इस दौरे के लिए सबसे बड़ा दांव ऐसे खिलाड़ी पर खेला जिसे टीम के वनडे कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी एक स्ट्राइक रोटेट करने वाले खिलाड़ी के रूप में नहीं मानते और इसी वजह से रहाणें को बांग्लादेश के खिलाफ दो मैच के लिए बाहर भी बैठा दिया. हम बात कर रहे हैं टीम इंडिया के नए कप्तान अजिंक्या रहाणे की.

रहाणे में ये है खास

रहाणे की इस बड़ी उपलब्धि को उनके बीते दो साल के प्रदर्शन का इनाम कहा जा सकता है. अपने क्रिकेट करियर में पहली बार रहाणे को किसी बड़ी टीम की कप्तानी का मौका मिला है और वो भी सीधे टीम इंडिया के वनडे स्क्वॉड का. पिछले दो साल में रहाणे टीम इंडिया के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी बन कर सामने आए हैं. सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के संन्यास के बाद अंजिक्या रहाणे ने टेस्ट टीम में तो अपनी जगह बना ली लेकिन वनडे टीम में अभी तक अपनी बल्लेबाजी के लिए सही पोजिशन के लिए भटकते दिखे. कभी सलामी बल्लेबाज तो कभी चौथे नंबर पर बल्लेबाजी ने उनकी बैटिंग में निंरतरता कमज़ोर कर दी. कप्तान धोनी भी उन्हें टीम में रखने से पहले कई बार सोचते नजॉर आए हैं. ऐसे में जब उन्हें टीम की कमान सौंपी गई है तो हम कह सकते हैं कि बीसीसीआई रहाणे को लंबी रेस का घोड़ा मानता है और आगे उन्हें और भी बड़ी जिम्मेदारी दे सकता है.

मुरली विजय से लेकर हरभजन तक पर भारी रहाणे

टीम में हरभजन सिंह और मुरली विजय जैसे सीनियर खिलाड़ी की वापसी जरूर हुई है लेकिन वो टीम में स्थायी नहीं हैं. मुरली विजय अब तक वनडे टीम के स्थायी सदस्य नहीं बन पाए हैं जबकि हरभजन सिंह चार साल बाद वनडे टीम में वापसी कर रहे हैं. ऐसे में चयनकर्ताओं के सामने रहाणे से बेहतर कोई और विकल्प नहीं हो सकता था.

रहाणे की बैंटिंग भी रही है शानदार

रहाणे ने बीते एक साल के दौरान 25 वनडे मैचों में दो शतक सहित 839 रन बनाए हैं. टेस्ट मैचों में भी वे भारत की ओर से खासे कामयाब बल्लेबाज़ रहे हैं. उन्होंने तीन टेस्ट शतक बनाए हैं और तीनों विदेशी पिचों पर. आपको बता दें कि रहाणे उस दिन चर्चा में आए थे जब उन्होंने 45 ओवर के मैच में 300 रन की पारी खेली थी. रहाणे अपने पावरफुल स्ट्रोक को भी काफी आसानी से खेलते हैं और ये उनकी बल्लेबाजी की सबसे बड़ी यूएसपी है. आईपीएल 2015 में भी उन्होंने दिखा दिया था कि वो छोटे फॉर्मेट में अपने स्ट्रोक और कॉपी बुक स्टाइल की बल्लेबाजी से तेजी के साथ बड़े स्कोर बना सकते हैं फिर चाहे कोई भी गेंदबाज सामने हो.

चारों तरफ है खुशी का माहौल

रहाणे के कोच से लेकर टीम इंडिया के पूर्व खिलाड़ी भी इस बात से काफी खुश हैं कि उनके सबसे बेहतर खिलाड़ी को टीम इंडिया की कमान सौंपी गई है. रहाणे को लेकर उन्होंने कहा कि जिस तरह उनकी बल्लेबाजी ने सबको खुश किया है वैसे ही वो अब अपनी कप्तानी से देश को आगे ले जाएंगे.

रहाणे में कप्तानी का ट्रेंप्रामेंट भी मौजूद है

रहाणे ने कम समय में खुद को बेहद मैच्योर क्रिकेटर बना लिया है. विपरित परिस्थिति में रहाणे खुद पर पर नियंत्रण रखना बखूबी जानते हैं. लेकिन अब देखना होगा कि रहाणे एक बल्लेबाज के बाद पूरी टीम की जिम्मेदारी कैसे उठाते हैं क्योंकि उन्हें न सिर्फ बल्लेबाजी में बल्कि गेंदबाजों को भी बेहतरीन ढंग से इस्तेमाल करना होगा. उन्हें अब हर समय नई रणनीति के साथ मैदान पर उतरना होगा और इस बात का फैसला दौरे के बाद ही चलेगा कि रहाणे एक बल्लेबाज के बाद एक कप्तान के रूप में किस तरह सफल होते हैं.

जीत की हैट्रिक- कौन रोकेगा भारत का विजय रथ

1002696_765365330165251_5218972129805905453_nपाकिस्तान जो हमसे कभी नहीं जीता, दक्षिण अफ्रीका जो हमसे कभी नहीं हारा (था) और यूएई जिसकी हमारे सामने कोई बिसात नहीं है- इन सब से तो टीम इंडिया ने दो-दो हाथ कर लिए और सब पर शानदार जीत दर्ज की. अब आने वाले शुक्रवार को जो मुकाबला वेस्ट इंडीज की टीम के साथ होने वाला है, उसमें सवाल यह उठता है कि क्या ये टीम भारतीय टीम का विजय रथ रोक पाएगी?

  विश्व कप शुरु होने से पहले ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हुई टेस्ट सीरीज और उसके बाद हुई त्रिकोणिय सीरीज में भारतीय टीम की जो हातल हुई थी उसे देखकर तो यही लगता था कि मुश्किले से अगर लीग मैचों में भी टीम की इज्जत बच जाए तो बड़ी बात है पर लगता है कि ऑस्ट्रेलिया में हुई दुर्गती से टीम के मनोबल पर प्रभाव पड़ने की जगह उनके अनुभव में चार-चांद लगा है जिसकी वजह से टीम इतनी मजबूत हो गई है कि क्या पाकिस्तान और क्या दक्षिण अफ्रीका.

 यूएई के खिलाफ ये मैच वैसे भी भारत के लिए प्रैक्टिस मैच साबित होने वाला था, इस प्रैक्टिस मैच की खास बात यह रही की इससे रोहित शर्मा (57 रन) जो पिछले दो मैचों से फ्लॉप साबित हो रहे थे वो लय में आ गए. आईसीसी ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें यह प्रश्न उठाया है कि क्या इस विश्व कप कोई स्पिन गेंदबाज ऐसा भी है जो अश्विन से बेहतर है. इसी के साथ आईसीसी ने एक वीडियो भी जारी की है जिसमें अश्विन की आज की शानदार गेंदबाजी दिखाई गई है जिसके सहारे उन्होंने चार विकेट लिए हैं- चौथा क्लिन बोल्ड!

 भारत के बल्लेबाज शानादार फॉर्म में हैं, शमी के जाने का बाद भी गेंदबाजी पर कम से कम इस मैच में कोई खासा प्रभाव नहीं पड़ा. ऐसे में वही सवाल फिर से उठता है कि क्या वेस्ट इंडीज की टीम में इतना दम-खम है कि वो टीम इंडिया को हरा सके

जीत का रिकॉर्ड बरकरार.

 

एडिलेड। आइसीसी क्रिकेट विश्व कप 2015 के सबसे बड़े मुकाबले में आज भारत और पाकिस्तान की टीमें आमने-सामने थीं। इस महामुकाबले में भारतीय टीम ने पाकिस्तान पर 76 रनों से जीत दर्ज करके विजयी छक्का लगाया है। यानी विश्व कप इतिहास में पाकिस्तान के खिलाफ ये भारत की छह मैचों में छठी जीत रही और पाकिस्तान एक बार फिर इस हार के सिलसिले को तोड़ने में असफल रहा। ये रनों के मामले में विश्व कप इतिहास में पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सबसे बड़ी जीत भी साबित हुई।

इससे पहले सबसे बड़ी जीत भारत ने 1999 विश्व कप में हासिल की थी जब भारत ने 47 रनों से मैच जीता था। भारत ने इस मैच में 301 रनों का लक्ष्य दिया जिसके जवाब में पाकिस्तान 47 ओवर में 224 के स्कोर पर ही सिमट गई। शतक जड़ने वाले भारतीय बल्लेबाज विराट कोहली (107) को मैन ऑफ द मैच के खिताब से नवाजा गया।

कोहली ने तोड़ा सचिन का रिकॉर्ड.

पाकिस्तान के खिलाफ वर्ल्ड कप में पहली सेंचुरी,

क्रिकेट वर्ल्ड कप के पहले ही मैच में अपने चिरप्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ विराट कोहली ने शतक लगाकर एक वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है. उन्होंने लगातार दूसरे वर्ल्ड कप के पहले मैच में ही शतक लगाने का रिकॉर्ड बनाया है. इसके साथ ही विराट वर्ल्ड कप के एक और रिकॉर्ड बुक में शामिल हो गए क्योंकि वर्ल्ड कप मुकाबलों में यह पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी भारतीय बल्लेबाज का पहला शतक है. इस शतक के साथ ही उन्होंने मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का पाकिस्तान के खिलाफ 12 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है. सचिन तेंदुलकर ने 2003 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ 98 रन बनाए थे.
विराट कोहली अपना दूसरा वर्ल्ड कप खेल रहे हैं और पहले ही मैच में शतक लगा कर उन्होंने एक और रिकॉर्ड बना दिया. कोहली लगातार दूसरे वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के पहले मैच में ही शतक लगाने वाले पहले क्रिकेटर भी हो गए हैं. इतना ही नहीं, कोहली के नाम अपने डेब्यू वर्ल्ड कप मैच में भी शतक लगाने का रिकॉर्ड है. 2011 में उन्होंने अपने पहले वर्ल्ड कप मैच में नाबाद 100 रन बनाए थे. वर्ल्ड कप में अपना 10वां मैच खेल रहे विराट कोहली का यह दूसरा शतक है.

बात अगर पाकिस्तान के खिलाफ वर्ल्ड कप में लगे शतकों की करें तो इनकी संख्या केवल चार है. यानी विराट पाकिस्तान के खिलाफ वर्ल्ड कप में शतक लगाने वाले चौथे बल्लेबाज हैं. उनसे पहले ऑस्ट्रेलिया के एंड्रूयू साइमंड्स (नाबाद 143, 2003 वर्ल्ड कप), न्यूजीलैंड के रॉस टेलर (नाबाद 131, 2011 वर्ल्ड कप) और वेस्टइंडीज के रिची रिचर्डसन (110, 1987 वर्ल्ड कप) पाकिस्तान के खिलाफ शतक लगा चुके हैं.

भारत-पाक मैच के बाद ट्रॉल हुए अनुष्का-विराट..

नई दिल्ली: ट्वीटर जिन चीज़ों के लिए जाना जाता है उनमें ट्रेड्स के बाद ट्रॉल्स बड़े मशहूर हैं और ऐसा कैसे हो सकता है कि भारत-पाक मैच के दौरान कोहली ने शतक लगया हो और ट्विटरेट्टीज़ उन्हें ट्रॉलिंग से बक्श दें! जब-जब कोहली ट्रॉल कर रहे होते हैं तो अनुष्का इसके अधूरेपन को पूरा करती हैं. तो पेश हैं आज के मैच से जुड़े ट्रॉल्स.

भीड़ अनुष्का को ढूंढ़ रही होती है

अपने ट्वीट से अनुष्का की प्रशंसक लगने वाली निशा ने लिखा है, “जैसे ही विराट शतक लगाते हैं भीड़ अनुष्का को ढूंढ़ रही होती है.”

विराट पूनम पांडे को तलाशने लगे

 वहीं चुटकी लेते हुए सोनल कालरा ने लिखा है, “विराट की नज़रे लगतार अनुष्का को ढूंढती रहीं, जब वे नहीं मिलीं तो विराट पूनम पांडे को तलाशने लगे.”

अनुष्का ने एक पाकिस्तानी लड़के को किस किया था

किसी ने फिल्म पीके में सुशांत सिंह राजपूत (जिन्होंने एक मुस्लिम लड़के का किरदार निभाया था) और अनुष्का की लव स्टोरी की कहानी याद दिलाते हुए लिखा है, “विराट को आज भी याद है कि पीके में अनुष्का ने एक पाकिस्तानी लड़के को किस किया था.”

अनुष्का होती तो विराट खुद को आऊट करवा लेते

अगर कोहली को प्यार और साथी खिलाड़ी के बीच चुनना होता तो वे किसे चुनते? एक ट्विटरेट्टी का मानना है कि अगर धवन की जगह अनुष्का होती तो विराट खुद को आऊट करवा लेते.

अनुष्का को निकालो, देश के लिए खेलो विराट

क्रिकेट प्रेमियों के जहन में आज भी पिछले मैचों में विराट द्वारा किया गया परफॉर्मेंस घर किए हुए है और शायद इसी वजह से एक यूजर ने ट्वीट किया है, “अनुष्का को दिमाग से निकाल कर देश के लिए खेलो विराट!”

खुशी है, अनुष्का ऑस्ट्रेलिया में नहीं हैं

अनुष्का की लिप सर्जरी के बाद से उनका खासा मज़ाक उड़ा है और ये मज़ाक कैसे होता हैं ये ट्वीट उसका नमूना है, “खुशी है कि अनुष्का ऑस्ट्रेलिया में विराट का ध्यान भटकाने के लिए नहीं हैं पर सुना है कि उनको भंयकर होटों को स्टेडियम में देखा गया है.”

अनुष्का वैलेंटाइन डे के दिन कैसे परफॉर्म करती हैं!

क्रिकेट का वैलेंटाइन कनेक्शन बनाते हुए एक ट्वीट में लिखा गया है, “विराट का परफार्मेंस इस बात पर निर्भर करता है कि अनुष्का वैलेंटाइन डे के दिन कैसे परफॉर्म करती हैं.”

विराट, अनुष्का के लिए लिप गार्ड

सबसे ज्यादा ट्रॉल्स जिन बातों से जुड़े हैं उनमें पीके, वैलेंटाइन डे और अनुष्का की लिप सर्जरी शामिल है, तो उनकी सर्जरी पर एक और ट्वीट में लिखा गया है, “अनुष्का विराट अपने लिए क्रिकेट से जुड़े सारे गार्डस खरीदते हैं और अनुष्का के लिए लिप गार्ड.”

…तो इसलिए पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने विराट के दो कैच छोड़ दिए

जैसा की बताया गया कि फिल्म पीके से जुड़े ट्रॉल्स सबसे ज्यादा हुए ट्रॉल्स में शामिल हैं तो इसमें विराट को मिले जीवनदान से जोड़ कर किया गया एक शामिल है जिसमें लिखा गया है, “लगता है पाकिस्तानी खिलाड़ी फिल्म पीके को कुछ ज्यादा ही सीरियसली ले रहे हैं, इसलिए उन्होंने विराट के दो कैच छोड़ दिए.”

अनुष्का और धवन ने एक-दूसरे को बताया कि…

वहीं जिस तरीके से भारत का दूसरा विकेट रन आउट की वजह से गिरा उसके बाद लगता है कि लोग इसका ठीकरा विराट पर ही फोड़ने वाले हैं. कम से कम इस ट्वीट से तो एसा ही लगता है जिसमें लिखा है, “अनुष्का और धवन ने एक-दूसरे को बताया कि विराट वुलाता है और खुद नहीं आता.”