दिल्ली और बिहार में हारने वाली बीजेपी का बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडू में क्या होगा!

 

प्रधानमंत्री जी, आप विकास का एजेंडा लेकर निकले थे…कितने सुहाने थे वो अच्छे दिन के वादे, वो हर खाते में 15 लाख देने की बातें लेकिन बिहार पहुंचते-पहुंचते आपको आरक्षण नाग ने डस लिया. आप जिस दूसरे धर्म वालों को 5 फीसदी आरक्षण का मुद्दा उछाले थे वो आपके भी उतने ही हैं, आखिर आप तो देश के मुखिया ठहरे! लगता है कि आप अभी तक गुजरात के फिज़ाओं से बाहर नहीं आए हैं.

आप ही बताइए कि आपके पार्टी अध्यक्ष ने बिहारियों को क्या समझकर ये कहा था कि अगर आप वहां हारे तो पाकिस्तान में पटाखे फूटेंगे? सर, गुजरात भले ही पाकिस्तान से बॉर्डर शेयर करता हो लेकिन बिहार तो नेपाल से बॉर्डर शेयर करता है. ये और बात है कि आपके आने के बाद से उस मित्र देश से भी भारत के रिश्ते ख़राब हो गए. ये भी अलग बात है कि चुनाव के बीच ही भारत-नेपाल सीमा में हुए प्रदर्शन में दो बिहारी मारे गए. पाकिस्तान में पाटखे वाले बयान का तुक क्या था, अब शायद आपको भी पता चल गया होगा कि आखिर वो बयान कितना बेतुका था?

सर, गिरिराज सिंह जी लोगों को जब मन तब पाकिस्तान भेजते रहते हैं. हैं कौन वो! एक जिले से सांसद और आपके मंत्री…पांच साल बाद होंगे कि नहीं उनको भी नहीं पता लेकिन देशभक्ती का सर्टिफिकेट बांटते फिरते हैं. सर, जब पूरी पार्टी आपके कंट्रोल में है तो ऐसे फ्रिंज एलिमेंट इस तरह की बयानबाजी कैसे कर लेते हैं.

एक बात और सर, हिंदुओं के लिए गाय का धार्मिक महत्व बहुत ज़्यादा है लेकिन बिहार को राज्य के तौर पर अभी भी रोटी, कपड़ा और मकान मयस्सर नहीं है. गाय पर राजनीति करते समय शायद आपलोग भूल गए कि लोगों के ज़ेहन में अभी तक अयोध्या वाले राम कौतूहल करते हैं, कई बार सवाल भी करते हैं कि मंदिर बना दिया क्या…अगर नहीं तो इतना बवाल क्यों हुआ था भाई!? वही हाल आपने गाय का भी कर दिया, राम की तरह गाय पर भी लोगों की आस्था ख़तरे में है. सर, सवाल है कि गाय को आगे करके डिजिटल इंडिया और मेक इंन इंडिया कैसे होगा.

शायद आप और आपकी पार्टी बार-बार भूल जाते हैं कि भले अंदर-अंदर और सोशल मीडिया पर आपका एजेंडा हिंदुत्वा था लेकिन आम चुनाव में भी आपको 31% वोट मिला है. उसमें एक बड़ा तबका वो भी होगा सर जो अच्छे दिन के जुमले में फंस गया होगा. सर, आपके लोगों ने धर्मनिरपेक्षता को जेहाद जैसा शब्द बना दिया है. खुद को सेक्यूलर बताने में लोग अब डरते हैं. लेकिन प्रोपगैंडा स्थाई नहीं होता सर, जर्मनी से रूस तक बुलट थ्यरी (एक झूठ को सौ बार बोलो ताकि वो सच हो जाए) फौरी तौर पर चलने के बाद फुस हो गई.

दिल्ली और बिहार की हार में एक बात समान है कि दोनों जगह आपकी पार्टी ने निगेटिव कैंपेन किया. आपको तो याद ही होगा कि 2014 के आम चुनावों से पहले कांग्रेस के मणिशंकर अय्यर ने आपको चाय वाला बताकर मजाक उड़ाया. कैसे हवा हो गए वे. आप पीएम बन गए, मणिशकर अय्यर के भी पीएम…खैर! दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 में आपने वही किया जो अय्यर ने आपके साथ किया था. आप दिल्ली के पूर्व सीम केजरीवाल को नक्सली बता गए और तब से लेकर अंत तक निगेटिव कैंपेन के जाल में फंस गए. ये सिलसिला बिहार में भी जारी रहा वरना अपने लोगों को कौन पाकिस्तानी करार देता है. नतीजे आपके सामने हैं.

किसी भी सूरत में बिहार को अगले पांच साल तक ठीक शासन नहीं मिलने वाला, नहीं लगता कि राज्य को जो सरकार मिलने वाली है वो बहुत बेहतर सरकार है. लेकिन एक बात तय है कि बिहार की तरह आने वाले चुनावों में बीजेपी की भी दुर्गती तय है. सोचिए जब दिल्ली में रहकर आपसे दिल्ली नहीं बची और बिहार में सलों तक सरकार में रहकर बिहार नहीं बचा तो असम, बंगाल, केरल, तमिलनाडू में तो आप न कहीं थे और ना कहीं हैं. राज्यसभा में बहुमत का सपना तो सपना ही रह जाएगा.

एक बात तय है कि आपकी पार्टी अब 1992 या 2014 के पहले वाली बीजेपी नहीं रही. कांग्रेस के बाद आप देश की एकमात्र दूसरी पार्टी हैं जिसने अपने बूते सरकार बना ली. लेकिन उसके लिए आपको इंदिरा गांधी का गरीबी हाटाओ के तर्ज पर अच्छे दिन का जुमला उछालना पड़ा. इस देश में ऐसे ही जुमले चलते हैं. इन्हीं जुमलों पर बहुमत की सरकारें बनती हैं. आपकी सरकार उसका सुबूत है. वरना आपको याद होगा कि 1992 के आपकी स्थिति सुधरी ज़रूर लेकिन आप सरकार बनाने की स्थिति में आधे सेक्यूलर वाजपयी जी के नेतृत्व में आए, सांप्रदायिक अडवाणी के नेतृत्व में नहीं. वहीं 2004 के आम चुनाव में हार के कारण पर बात करते हुए वाजपयी जी ने गोधरा दंगों को भी बड़ा कारण बताया था. राम, अल्लाह, गाय और सूअर काठ की हांडियां हैं सर, एकाधी बार चढ़ सकती हैं…बार-बार नहीं.

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